भाव, रस और ताल से बने भारत की सम्वेदनाओं की अभिव्यक्ति
सम्वेदना के स्वर
यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,
जिसमें भावरस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-र-त बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....
आज पहली बार पॉडकास्ट करने की सोची. बहुत से लोगों की देखा देखी, सोचा अपना गला भी आजमा कर देखते हैं, तो इस बार कलम और की पैड को आराम देते हुये, पेश है हमारी पहली पॉडकास्ट!!