सम्वेदना के स्वर

यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,

जिसमें भाव रस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-- बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....

Saturday, April 30, 2011

हमारे प्रिंसिपल बेकसूर हैं!

पिछले दिनों चंडीगढ़ के एक नामी स्कूल सेंट जेवियर में एक दुर्घटना घटी. बताया गया कि दसवीं कक्षा की एक छात्रा, स्कूल की तीसरी मंज़िल से गिर पड़ी। यह खबर न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि देश भर के मीडिया में चर्चा का विषय बन गयी। घटना के विभिन्न पक्ष इस तरह हैं :

छात्रा के अभिभावकों का पक्ष : हादसे में घायल छात्रा के अभिभावकों का कहना है (जिसे बाद में छात्रा ने भी दुहराया है) कि छात्रा १२ वीं क्लास के अपने एक मित्र के साथ उसी की कक्षा में (जो कि ग्राउंड फ्लोर पर है) इंटर कालिज डिबेट की तैयारी कर रही थी. अचानक स्कूल के टीचर्स के साथ, प्रिंसिपल वहाँ आये और दोनों को खूब डांटा। फिर उत्तेजित होकर प्रिंसिपल उसे तीसरी मंजिल पर ले गये और वहाँ से नीचे धक्का दे दिया। कंक्रीट के ग्राउंड पर गिरने के कारण, छात्रा के जबड़े पर चोट आयी और सामने के दाँत टूट गये।

छात्रा दो दिन आई.सी.यू. में भर्ती रहने के बाद, फिलहाल जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दी गयी है। स्कूल पर एक करोड़ रुपये के मुआवज़े का दावा किया गया है तथा प्रिंसिपल पर छात्रा की हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दायर कर दिया गया है।
स्कूल और प्रिंसिपल का पक्ष : प्रिंसिपल को टीचर्स के द्वारा पता चला कि छात्रा १२वीं क्लास के अपने एक मित्र के साथ (जो गह्न्तों पहले छुट्टी होने के बाद भी घर नहीं गया था) खाली कक्षा (जो गाउंड फ्लोर पर है) में है, जबकि छात्रा की क्लास फर्स्ट फ्लोर पर है। प्रिंसिपल वहाँ आये और दोनों से जवाब तलब की, उनको डांटा और समझाया. इसके बाद छात्र को अपने साथ ले गये और उसके अभिभावकों को बुलाने के लिये सन्देश भेज दिया। इस बीच छात्रा ने फर्स्ट फ्लोर पर स्थित अपनी कक्षा के बाहर वाटर कूलर से पानी पिया और रेलिंग से नीचे कूद गयी, जिससे उसके जबड़े और मुँह पर गम्भीर चोटें लगीं। प्रिंसिपल उस समय अपने कमरे में किसी अभिभावक से बात कर रहे थे. जैसे ही उन्हें पता चला वह तुरंत वहाँ पहुंचे और छात्रा को अपने हाथों से उठाकर अपने गाड़ी में नज़दीकी हस्पताल ले गये. दुर्घटना के 20 मिनट के अन्दर ही निकट के अस्पताल में छात्रा को प्राथमिक चिकित्सा दी गयी और फिर करीब 3 घण्टे के अंदर शहर के बड़े अस्पताल में छात्रा को दाखिल करा दिया गया, जहाँ वो खतरे से बाहर बतायी गयी।

मीडिया की प्रतिक्रिया : इस पूरे प्रकरण पर स्थानीय चैनलों ने कमोबेश संयमित प्रतिक्रिया दी, जैसे छात्रा द्वारा आत्महत्या का प्रयास, प्रिंसिपल पर धक्का देने का आरोप आदि।

हालांकि इसके बाद जैसे-जैसे राष्ट्रीय चैनलों के चंड़ीगढ़ सम्वाददाताओं का आगमन प्रारम्भ हुआ, देश के सभी बड़े चैनलों की क्राईम-रिपोर्टिंग की दुकानें सजने लगीं और असर उनके उत्पादों में दिखने लगा। फटाफट और झटपट खबरों की सुर्खियों में टीआरपी वाली उत्तेजना और तीखापन दिखने लगा। एक बानगी – “बेरहम प्रिंसिपल ने छात्रा को छत से नीचे फेंका”, “क्या हुआ चंडीगढ़ के स्कूल में देखिये आज शाम सात बजे”, “प्रिंसिपल का आतकं”, “मुझे प्रिंसिपल ने अपमानित किया और धक्का दिया- छात्रा का आरोप”.

प्रिंट मीडिया की खबरें शुरु के कुछ दिनों तक तो न्यूज़ चैनलों की तरह ही चलीं, किन्तु तब तक स्कूल का पक्ष और अन्य अभिभावकों के स्कूल के बचाव में आने की खबरे स्थानीय समाचार पत्रों में आने लगीं। प्रिंसिपल के पक्ष में कैंडल-मार्च की खबरों के बीच छात्रा के अभिभावकों द्वारा एक करोड़ रुपये के मुआवज़े और प्रिंसिपल पर किए गए मुकदमें की खबरें भी आने लगीं। सी.एफ.एस.एल. की टीम के हवाले से खबर यह भी छपी कि छात्रा पहली मंजिल से गिरी लगती है, न कि तीसरी मंज़िल से जैसा दावा किया गया है।


चंडीगढ़ के जंतर मंतर पर : चंडीगढ़ के सेक्टर 17-सी के प्लाज़ा को यहाँ का जंतर मंतर कहा जा सकता है। जसपाल भट्टी अक्सर अपने प्रदर्शन करते हुए यहीं दिखाई देते हैं। अन्ना हज़ारे के अनशन के समय भी यह स्थान सुर्खियों में था। सेंट जेवियर की इस घटना के बाद प्रिंसिपल के पक्ष में कई दिनों कैंडल-लाईट-मार्च हुए।

मेरी प्रतिक्रिया : तीन बरस पहले जब में नोएडा से चंडीगढ़ आया तो अपनी बेटी सम्बोधि का एडमिशन इसी स्कूल में, पांचवीं कक्षा में करवाया
इसी स्कूल में एडमिशन कराने की एक ख़ास वज़ह थी, प्रिंसिपल मर्विन वेस्ट का बेहतरीन व्यक्तित्व जिसके कारण मैं पहली ही मुलाकात में उनका मुरीद हो गया। आमतौर पर शर्मीले स्वभाव की मेरी बेटी, प्रिंसिपल मर्विन वेस्ट के साथ मात्र 5 मिनट की बातचीत में इतनी सहजता से पेश आ रही थी, जैसे प्रिंसिपल कोई दोस्त हों! गुरु-शिष्य की यह केमिस्ट्री मेरे लिये एक सुखद आश्चर्य थी। इसके बाद बड़ी ही सहजता से मैने बाकी स्कूलों के एपलिकेशन फार्म फेंक दिये और सम्बोधि का इस स्कूल में एडमिशन करवाया। इसके बाद शुरु हुआ बिटिया का प्रिंसिपल-पुराण, जो पिछले 3 साल से अनवरत चालू है। पापा आज प्रिंसिपल सर ने सब को योग की क्लास में जाने कि लिये कहा, आज हमने अनुलोम-विलोम प्राणायाम किया, आज हमारे स्कूल की क्रिकेट टीम ने इंटर स्कूल चैम्पियन बनने पर प्रिंसिपल सर को कन्धे पर उठा लिया, आज १२वीं क्लास के बच्चों की फेयरवेल पार्टी में प्रिंसिपल सर रो पड़े, आज प्रिंसिपल सर ने पानी की बर्बादी नहीं करने को कहा, आज प्रिंसिपल सर ने अपने नाना-नानी और दादा-दादी का ख्याल रखने को कहा. कितनी ही बातें, जिन्हे सुनकर मन को शांति मिलती कि इन बच्चों को इतने अच्छे व्यक्तित्व की छाया मिली है।

अब तो हमें ऐसा लगता है कि प्रिंसिपल मर्विन वेस्ट हमारे घर में अदृश्य रूप से उपस्थिति हैं। शायद यही कारण होगा कि स्कूल में घटी इस घटना के बाद बेटी बहुत उदास है और कहती है कि हमारे सर ऐसे नहीं हैं। हमारे प्रिंसिपल बेकसूर हैं! अपनी कहूँ तो घटना के बाद, कई दिनों तक मैं भी बहुत अनमना सा रहा। सलिल भाई से भी इसका जिक्र किया। पर मन मसोस कर रह गये हम. दुनियादारी की सम्झ तो यही कहकर बेडियाँ दाल देती हैं कि पुलिस, व्यवस्था, आचार संहिता, न्याय प्रक्रिया तो बस एक लम्बे खेल की शुरुआत भर है. ऐसे मामलों में चतुर सुजानों के मुहँ से अक्सर सुनते आये हैं कि law will take its own course. लेकिन जिसने जीवन में इज्जत ही कमाई हो उसके लिये तो Justice Delayed is Justice Denied.

कल शाम बेटी ने बताया कि प्रिंसिपल सर इतने दिनों बाद आज एसेम्बली में आये और उन्होने कहा, “प्यारे बच्चों!! अपनी मित्र के स्वास्थ के लिये प्रार्थना करना और ईश्वर से यह भी कहना कि इस लड़ाई में केवल सच की जीत हो”.

Thursday, April 28, 2011

KBC-फाईव, कार्टून-लाईव !

आज सुबह "आज समाज" समाचार पत्र में प्रकाशित "मंसूर नकवी" का यह कार्टून उस चाकलेट की तरह लगा जिसे देखकर पहले तो होठों पर मुस्कान आ गयी और फिर इसने जीभ को छुआ  तो आर्थिक उदारीकरण, भारतीय राजनीति और न्याय व्यव्स्था  सब के एक मिश्रित कसैले स्वाद से मुहँ भर गया!     

Saturday, April 23, 2011

अली बाबा और 40 चोर

अन्धेर नगरी में इन दिनों एक अनजान सा बूढ़ा साधू न जाने कहाँ से आ गया है. उसके हाथों में एक अजीब सी चीज़ है. जनता से वह कहता फिर रहा है कि यह दीया है. चौपट राजा ने अग्नि को बंदी बना रखा है. एक बार यह दीया उस अग्नि से छू भर जाये तो वह जल उठेगा. फिर उस एक दीये के प्रताप से अन्धेर नगरी में हजारों लाखों दीये जल जायेंगे. हर ओर प्रकाश ही प्रकाश होगा। अन्धेर नगरी की जनता, जिसने बरसों से प्रकाश का अनुभव नहीं किया था, बूढ़े और उसके दीये के इस दावे को सच माने, दीवानी हुयी जाती थी। वे बुजुर्ग, जिन्होने अपने पूर्वजों से रोशनी की दंत कथायें भर सुनीं थीं, वे भी बड़ी आशा से उस बूढ़े को टकटकी लगाये देख रहे थे.

दूसरी ओर अन्धेर नगरी का सबसे बड़ा और अन्धा सच यह है कि चौपट राजा सिर्फ नाम का राजा है। दशकों पहले मरजीना ने बड़ी चालाकी से अली-बाबा और 40 चोरों के साथ सांठगांठ करके, अन्धेर नगरी को अपने कब्जे में ले लिया था. अन्धेरे में जीने की आदी जनता को कुछ दिखाई तो देता नहीं था, बस जो सुनती, उसी पर विश्वास कर लेती। जनता का सच तो यही था कि उसे यदा कदा चौपट राजा और उसके दरबारियों की आवाज़ें ही सुनायी पड़ती थी और वह उसे ही अपना सच मानती। इधर बूढ़े और उसके दीये के स्वप्न को लेकर अन्धेर नगरी के राज दरबार में अचानक डर का माहौल बनने लगा. अन्धेर नगरी में सब तरफ अफवाहों का बाज़ार गर्म हो चला है। खासकर 40 चोरों का गिरोह बहुत भयभीत है, क्योंकि उसे अन्देशा है कि यदि रोशनी आ गयी तो उनका असली चेहरा सबको दिखाई दे जाएगा. वो सब पहचाने जायेंगे। चोरी का धन्धा ही बन्द हो जायेगा।

अली-बाबा और उसके साथी 40 चोरों की बातचीत :-

चोर-१: छीन लो इस बूढ़े का दीया।

चोर-२: अब इस काम के लिये बहुत देर हो चुकी है। बूढ़े के साथियों ने दीये को चारों ओर से घेर कर इंसानी दीवार बना दी है।

चोर-३: तो फिर चौपट राजा का फरमान लेकर आओ. इस बूढ़े और इसके साथ खड़े लोगों को तुरंत काल कोठरी में डाल दो।

चोर-४: नहीं, अभी तो चौपट राजा खुद ही बहुत डरा हुआ है इस पागल जनता से। पता नहीं क्यों अन्धेर नगरी की जनता बूढ़े के दीये को रोशन करने को पगलाई जा रही है।

चोर-५: तो कोई मरजीना को बोलकर इस चौपट राजा से जबरदस्ती फरमान ले लो। और इस बूढ़े और इसके साथ खड़े लोगों को काल कोठरी में डाल दो।

चोर-६: जनता का गुस्सा देखकर मरजीना आगे नहीं आ रही है. ऐसा सुनने मे आया है कि बहुत हुआ तो वह चौपट राजा की बलि देकर जनता से खुद को बचा लेगी।

चोर-७: तो हमारा क्या होगा? क्या हमारी भी बलि चढ़ सकती है।

चोर-८: ये साला बूढ़ा! दीया जलायेगा कैसे? हम इसे अग्नि देंगे तब न?

चोर-९: अबे! इन #@# ने हाथों में पत्थर उठाये हुए है. संयोग से कहीं रगड़ खाकर इनसे चिंगारी निकली तो इनको अग्नि का सारा खेल समझ आ जायेगा और ये हमारी अग्नि के बिना ही दीया जलाने में सफल हो जायेंगे।

दस नम्बरी: मैं अपनी वकील बुद्धि से जनता को समझाने की कोशिश करता हूं कि यह “ज़ीरो प्रकाश शक्ति का दीया” है, इससे रोशनी कभी हो ही नहीं पाएगी।

चोर-११: मैंने अपने ब्लैकमेलिंग के धन्धे में बहुत फोन टैप किये हैं। फोन रिकार्डिंग बता रही है कि जनता रोशनी के ख्याब सजाये बैठी है। फिलहाल उसे समझाकर घर बैठाना बहुत मुश्किल होगा।

चोर-१२: रोशनी आ गयी तो क्या होगा? साला आदमी मालामाल हो जायेगा क्या?

चोर-१३: मरजीना बड़ी तैराक है, लूट का माल लेकर सात समन्दर पार निकल जायेगी।

चोर-१४: फिर हमारा क्या होगा!! हमारी भैंस तो गयी पानी में!!!

चोर-१५: नहीं, कोई ऐसी तरकीब निकालो कि चौपट राजा के दरबार में जब यह बूढ़ा दीया लेकर पहुंचे, तो इसका दीया ही बदल दिया जाये । इसे ऐसा पानी भरा दीया थमा दिया जाये जो कभी जल ही न सके।

चोर-१६(चोर-१७ से): भईय्या! पिता जी से तुमने चोरी चकारी की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, कुछ चलाओ अपनी कुटिल बुद्धि का जादू। कोई बिच्छू छोड़ो इस माहौल में।

चोर-१७: नोटों की बारिश कराकर मैं जनता को कुछ देर के लिये तो दूर रख सकता हूं। पर मेरी दुकान का नुकसान हुआ तो याद रखना, जब मैं अपने सगे भाई को नहीं छोड़ सकता, तो यह चौपट राजा और मरजीना क्या चीज़ हैं।

चोर-१८: हूड़ी बाबा! मेरा ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया है। अन्धेर नगरी में रोशनी आ जायेगी तो हम जैसे उल्लू जो सबसे चतुर दरबारी बने बैठे हैं, वो तो उल्लू के पट्ठे साबित हो जायेंगे।

चोर-१९: अन्धेर नगरी की वैल्थ हम चोरों की कामनवैल्थ है।

चोर-२०: पिछली लूट में मेरा हिस्सा पूरा नहीं मिला था, उल्टा मरजीना मेरे खिलाफ हो गयी। मै मदद तभी करूंगा जब मेरी लूट का माल वापस मिलेगा।

चोर-२१: कोई इस अहमक बूढ़े को बताये कि “माना कि पैसा खुदा नहीं पर ये खुदा से कम भी नहीं.”

चोर-२२: रोशनी आ भी गयी तो भी मैं अपना काला चश्मा कभी नहीं उतारुंगा। चोरी और लूट हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और काला चश्मा हम चोरों का प्रतीक.

चोर-२३: चोरी और लूट को इंडस्ट्री का दर्जा हमने दिलाया है, अन्धेर नगरी में चोरी और लूट की शिक्षा के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों मे धड़ाधड़ रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं।

चोर-२४: अन्धेर नगरी को रोशनी के प्रकोप से हर हाल में बचाया जायेगा।

चोर-२५: मै अपने चैनल पर कुछ सीडी चलाकर इस बूढ़े के खिलाफ माहौल बनाता हूं।

चोर-२६: मै भी अपने चैनल पर कुछ ऐसा ही चक्कर चलाता हूं।

चोर-२७: हम चोरों में एका रहना बहुत जरूरी है, मै अपनी जीरा भांडीया एडं पार्टी को काम पर लगाता हूं।

चोर-२८: अगर ये चौपट राजा इस हंगामे की बलि चढ़ गया तो तुम सब तब मुझे अगला चौपट राजा चुनना।

चोर-२९: चुनाव तो लूट का उत्सव है वह तो चलता रहना ही चाहिये, धन्धे को कोई नुकसान हम न होने देंगें। चोर-३०:अए मुझे औरत जानकर ये मत समझ लेना कि लूट का सब माल तुम्हारा है?

चोर-३१: नहीं बहनजी! चोर-चोर मौसेरे भाई तो पुरानी बात हो गई, नया सुर है चोर-चोर मौसेरे भाई बहन।

चोर-३२: अईय्यो!! एक मोटी बहन इधर भी है।

चोर-३३: वो सब बाद में, पहले ये तो पता करो कि इस दीये का पापा कौन है।

चोर-३४: जहाँ तक इस चौपट राजा का सवाल है इसने तो पूरी ईमानदारी से अपना काम किया है और यही कारण है कि लूट के माल के बंटवारे को लेकर हम लोगों में कभी कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ है।

चोर-३५: हमें जनता को बताना है कि ये मरजीना हमेशा आप लोगों के लिये त्याग करती रही है। आगे भी ऐसा ही होगा, हम लोग और त्याग करेंगे।

चोर-३६: इस येदु-हडप्पा का तो यही कहना है कि कुछ समय के लिये हमें अपने बच्चों को अपने से अलग कर देना चाहिये इससे जनता कुछ शांत हो जायेगी।

चोर-३७: माना कि हम बहुत बड़े चोर हैं, पर छोटे छोटे चोर तो साले सब हैं इस अन्धेरे नगरी में। आने दो रोशनी को.

चोर-३८: अब सिर्फ चोर नहीं हैं हम, लूटेरे हैं। लूट लेंगे इनका दीया। इसकी रोशनी हमारी इज़ाज़त के बगैर कहीं नहीं जा सकती।

चोर-३९: डरने की कोई जरुरत नहीं है. 63 साल से घना अन्धेरा भरा है हमने, इस अन्धेर नगरी में। एक दीया जल भी गया तो क्या होगा?

चोर-४०: अबे मूरख ऐसे तर्क तेरी चोरी की वकालत में तो चल सकते हैं असलियत में नहीं। अन्धेरा चाहे हजारॉ साल पुराना हो, सिर्फ एक दीया काफी है उसे एक पल में भगाने के लिए।

(इसी बीच अली और बाबा का प्रवेश)

अली : सुनों! सुनों ! अब कोई ईडी-याँ नहीं घिसेगा। हमारे हीरो बाबा हैं, बाबा आप ही कुछ करो।

बाबा : मै अपना काम चुपचाप पीछे से करता हूं। मुझे हीरो बनने का कोई शौक नहीं है।

Monday, April 11, 2011

हम अण्णा के अन्धभक्त हैं.... और आप?

मेरठ छावनी से उठी आज़ादी के जंग की लपट, स्वतन्त्रता की पहली लड़ाई के रूप में आज भी दर्ज है. कई इतिहासकार उसे महज एक विद्रोह का नाम देते रहे हैं और इस विद्रोह के दमन की कहानी सुनाते रहे हैं. वास्तव में (कु)व्यवस्था के विरुद्ध जब भी किसी ने आवाज़ उठायी है, व्यवस्था का सारा तंत्र उसे विद्रोह का नाम देता रहा है. अब जंतर मंतर पर शनिवार को जो हुआ, उसे १८५७ की पुनरावृत्ति भले ही न माना जाए, सारे तथाकथित नेता उसे विद्रोह कहने में लगे हैं और बढ़ चढ़कर यह साबित करने में लगे हैं की इस जन लोकपाल विधेयक से कुछ भी नहीं होने वाला. उनकी छत्रधारी सेना ने अर्थ के अनर्थ और अपने अमूल्य ज्ञान कोष से यह बताना प्रारम्भ कर दिया है कि अण्णा को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, किनको साथ लेकर चलना चाहिए और किनको छोड़ देना चाहिए आदि. ऐसे बयान देने चाहिए ऐसे नहीं. अब उनको कौन समझाए कि यह तौल-तौल कर बोलना और हर बोल के राजनैतिक परिणाम सोचना, उस मानसिकता का प्रतीक है जो बिके हुये मीडिया के जरिये माहौल बनाती बिगाड़ती है। और आज कोई भी इन माईक-छतरी वालों की कुविधा से बच भी नहीं सकता. यह हर बात के मतलब निकालते हैं, क्योंकि इनके पालकों की पूरी व्यव्स्था को खतरा महसूस हो रहा है. यह सब तो आगे इस युद्ध में होगा ही। चाहे इसे वे विद्रोह ही क्यों ना कहें.

पर इतना याद रखने की ज़रुरत है कि अण्णा के अन्दर लोगों ने असली गांधी देख लिया है. मंदिर के आहाते को अपना घर मानने वाले अण्णा हजारे का निष्पाप जीवन महर्षि दधीचि की याद दिलाता है जिन्होंने अपनी हड्डियां, राक्षसों के के विरुद्ध होने वाले संग्राम के लिए वज्र बनाने हेतु दान कर दीं. यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि तपस्वी अण्णा का एक एक वचन अब सिद्ध हो चुका है, और वह इस झूठ के बाज़ार में सच का आईना है।

ये मनमोहन सिहं, मोदी, नितीश, रामदेव, पवार जैसे शब्द भी जब अण्णा के मुख से प्रस्फुटित होते हैं, तो वह भी कोई सत्य उजागर कर रहे होते हैं। अण्णा जब मनमोहन सिहं को ईमानदार व्यक्ति कहते हैं तो यह बात कि वह देश की भ्रष्ट सरकार के मुखिया हैं पार्श्व में होती है, इसी तरह जब मोदी सा ग्राम विकास करने को कहते हैं तो 2002 के दंगे पार्श्व में होते हैं, यह अण्णा का नीर क्षीर विवेक ही है। अण्णा पर अन्ध श्रद्धा तो करनी ही होगी इस देश की जनता को, इसके अतिरिक्त उपाय ही क्या है? हम न भूलें कि सदियों की गुलामी की वज़ह से कायरता हमारे डीएनए में आ गयी है. ऐसे में अण्णा की जेनेटिक इंजीनियरिंग पर भरोसे के सिवा हमारे पास और कोई समाधान नहीं है।

आवश्यकता है, बस हर मंच से चीख-चीख कर अण्णा के पक्ष में माहौल बनाएं हम सब। भारतीय राजनीति के सभी नाम अब बौने हैं। यह क्रान्ति है या विद्रोह, भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिगुल है या एलानेजंग, ये सारे सवाल बेमानी हैं.

सवाल है तो सिर्फ एक: आप अण्णा के साथ है या नहीं!

हमें गर्व है कि हम अण्णा के अन्धभक्त हैं.

Saturday, April 9, 2011

थैंक्यू अन्ना!

ईमानदार” प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार ने एक सच्चे संत के सामने अंतत: घुटने टेक दिये और आज सुबह अन्ना ने अपना अनशन तोड़ दिया।

   सरकारी नोटिफिकेशन की प्रति जनता की अदालत में

अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में देश की जनता ने जिस अन्दाज़ में अपना समर्थन दिया है, उसे देखकर घोर निराशा में जी रहे हम जैसे बहुत से लोगों के भीतर उम्मीदें फिर जाग गयीं हैं।


नवरात्र के इन पिछले पांच दिनों के सारे धटनाक्रम का मनोवैज्ञानिक पहलू यह रहा कि हमारी तरह पूरे देश ने  घनघोर अव्यव्स्था से उपजे अवसाद को बहुत ही गाधींवादी तरीके से बाहर निकालकर कैथार्टिक रिलीफ महसूस किया।

आदर्श व्यव्स्था तो यह होती कि जनता के द्वारा चुनी हुयी सरकार, सत्य की तरह सरल और निष्पाप होती परंतु जो कूटनीति और दबाब की राजनीति सरकार ने खेली, वह उलटा उसी के गले पढ़ गयी। और अब, सरकार के पांच प्रतिनिधि (प्रणव मुखर्जी, कपिल सिब्बल, चिदम्बरम, वीरप्पा मोएली और सलमान खुर्शीद) अन्ना की टीम (अन्ना हज़ारे, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, संतोष हेगडे, अर्विन्द खेजरीवाल) के सामने बहुत बौने दिखाई दे रहें हैं।

पहला कदम उठा लिया गया है। थैंकू अन्ना !!

Friday, April 8, 2011

अन्ना हज़ारे पर आज सिर्फ कुछ प्रतिक्रियायें

जन्तर मन्तर, नई दिल्ली और सेक्टर 17 सी, प्लाज़ा चंडीगढ से लोगों की कुछ जीवंत प्रतिक्रियायें

1. प्रधानमंत्री के पास क्रिकेट का वर्ल्ड कप मैच देखने का समय है, पर अन्ना से मिलने का समय नहीं है?

2. सरकारी लोकपाल बिल, दूध की रखवाली के लिये बिल्ली को नियुक्त करने जैसा है।

3. सरकार ने कुछ मंडी टीवी चैनलों के माधय्म से अन्ना हज़ारे और उनके अभियान के बारे में दुष्प्रचार शुरु किया है। उनका कहना है कि अन्ना और उनके लोग चुनाव जीत कर दिखायें तभी अपना बिल संसद में पास करा सकते हैं।

4. अपना घर अब हमें खुद साफ करना होगा।

5. ये नेता जनता के नौकर हैं, इनकी मालिक जनता है, ये नेता मालिक नहीं हैं।

6. एक बार चुनाव जीतने पर इन नेताऑ को देश लूटने का लाइसेंस नहीं मिल जाता।
- अरविंद केजरीवाल

7. प्रोफेसर राहुल गाँधी जो विश्वविद्यालयों में जाकर प्रवचन देते हैं, वो कहां हैं? उनके क्या विचार हैं इस जन लोकपाल बिल पर?

8. विश्व कप जीतने पर नई दिल्ली की सड़कों पर जीत का जश्न मनाने निकली श्रीमती सोनिया गाँधी क्या अन्ना से मिलने जन्तर मंतर नहीं आ सकती?

9. भाजपा जैसी पार्टियाँ भी दूध के धुली नहीं हैं, उन्होने तो सत्ता की खातिर अपने कोर मुद्दे तक ताक पर रख दिये, इस बिल के बारे में तो बात ही क्या करना।

10. विपक्ष यदि इस विषय पर सीरियस है, तो जन लोकपाल बिल के समर्थन में आये और उसके संसद सदस्य इसके समर्थन में हस्ताक्षर करें।

11. करोड़ॉ रुपये के चाय और बिस्क़ुट अपनी एक छोटी सी मीटिंग में चाट जाने वाली सरकार की असम्वेदनशीलता का इससे बढकर उदाहरण और क्या होगा कि पिछले चार दिन से भूखे 73 वर्ष के अन्ना हज़ारे के अनशन के दिनों को बढता देख रही है।

12. अन्ना नहीं ये आँधी है, देश का असली गाँधी है।

13. अब ताज उछाले जायेंगे, अब तख्त गिराये जायेंगे।

14. रात को ये हौसला खलता रहेगा रातभर.
      एक मिट्टी का दिया जलता रहेगा रातभर .
                                                                               - रवि

अंतर्जाल पर अन्ना के बारे में कुछ रोचक लिंक





इस ब्लोग के दाहिने “ब्लोग के गलियारे” में अन्ना के बारे में लिखी ब्लोग पोस्टों पर भी आप आमंत्रित हैं।

Thursday, April 7, 2011

एक दो तीन चार, अन्ना तेरे हम हैं साथ


एक
व्यवस्था का भ्रष्टाचार जिसे सहन नहीं था
और फिर
भ्रष्टाचार के ही व्यवस्था बन जाने पर
वह, व्यवस्था को सहन नहीं था।

किसी फकीर का आशीर्वाद लेने
वो कल जंतर-मंतर गया था।

दो
पिछली चुनाव रैली में
जिस 13 साल के लड़के ने
भीड़ चीर कर तुमसे हाथ मिलाया था

जंतर मंतर पर खड़ा वो
आज तुम पर उंगली उठा रहा है

वो अब 18 का हो गया है।

तीन
आज दफ्तर के कोने में पड़ी
बापू की तस्वीर उसने ढूंढ निकाली

और अन्ना अन्ना बुदबुदाते हुये
अपने सीने से लगा ली।

चार
भेड़िय़ॉं के झुंड़ में
दो दिनों से
बहुत खलबली है।

एक गाय ने अपने सींग में
श्मशान की राख मली है।


Monday, April 4, 2011

धोनी सचिन कपिल हज़ारे, देखो अब ये देश न हारे!

आई.सी.सी. विश्व कप २०११ की विजय के साथ ही पूरा देश जश्न में डूब गया. होना भी चाहिए. २८ वर्षों के बाद यह खुशी दोहराई गयी. कई लोगों ने यह जश्न 1983 के बाद दुबारा देखा जब भारत विश्वविजयी कहलाया. वर्ष २०१०-११ भारत के लिए उपलब्धियों का वर्ष रहा. राष्ट्रमंडल खेल का सफल आयोजन और फिर विश्व-कप क्रिकेट.

आज विश्व के शिखर पर अपना तिरंगा फहराते हुए, यह दिखाई न दे रहा हो कि पिछले दिनों अपने देश को इन राजनेताओं ने किन गर्त्त में पहुंचा रखा था. एक ओर जीत के त्यौहार पर खुशियों की लहर में भीगते देशवासी और दूसरी ओर भ्रष्टाचार, अपराध और बेशर्मी की पराकाष्ठाएं छूने वाले ये राजनेता. इसे विडम्बना ही कहा जायेगा कि ताजा घोटालों में जिस बड़े नेता का नाम आया उसी के हाथों यह ट्राफी भारतीय टीम को मिली। खैर! विविधताओं के देश में जहां एक ओर देश के करोड़ों रूपये ग़बन कर डकार जाने वाले लोग हैं, तो दूसरी ओर क्रिकेट को धर्म मानने वाली उत्साही जनता.

सचिन और धोनी की इस अनुभव और ऊर्जा से लबरेज़ टीम से इतर, एक और हीरो हैं अपने देश के. ७३ साल के नवजवान. अपनी धुन में मगन. १९६५ के भारत पाक युद्ध के दौरान ये फ़ौज में ट्रक ड्राइवर हुआ करते थे. सीमा पर जब पाकिस्तानी हवाई हमलावरों को देखा तो भागकर ज़मीन पर लेट गए. बम गिरा, ट्रक जलकर स्वाहा, ये अकेले ज़िंदा बच निकले. रियल हीरो!! विवेकानंद की एक पुस्तक पढ़ने के बाद उनको जीवन का लक्ष्य मिल गया और उन्होंने फैसला किया कि जीवन का बस एकमात्र लक्ष्य है समाज की सेवा करना और सारा जीवन वर्त्तमान समाज को “आदर्श समाज” बनाने में अर्पण कर देना. पंद्रह साल फ़ौज की नौकरी करने के बाद स्वेच्छा से रिटायरमेंट ले लिया और जो पैसे मिले उससे गाँव के विकास के लिए काम करने का बीड़ा उठा लिया.

अपने गाँव रालेगांव में इन्होने युवा शक्ति को संगठित किया और अपनी सारी निधि इस कार्य के लिए समर्पित कर दी. गाँव को जल सरक्षण का पाठ पढ़ाया, रबी और खरीफ की फसलों में वृद्धि के मार्ग सुझाए, गाँव को नशामुक्त किया और प्याज के उत्पादन में निर्यात करने की सक्षमता प्रदान की. और यह सब संभव हो पाया सिर्फ उनके संगठन की रास्ते पर चलकर. गाँव के युवकों ने आज से २२ वर्ष पूर्व जो होली मनाई, वैसी होली आज सारे देश में मनाये जाने की आवश्यकता है. इन युवकों ने गाँव में मौजूद सारे तम्बाकू उत्पाद, बीडी और सिगरेट की होली जलाई. आज गाँव में शाब्दिक अर्थों में दूध की नदियाँ बहती हैं. इस हीरो ने गाँव में शिक्षा की लहर दौडाई, छुआछूत का खात्मा किया और अपने गाँव को हर प्रकार से एक आदर्श गाँव बनाया.

इससे सुन्दर क्या होगा कि यह गाँव हर साल २ अक्टूबर को अपना जन्मदिन मनाता है. और इस जन्मदिन पर गाँव के सबसे बुज़ुर्ग पुरुष और महिला को सम्मानित किया जाता है. यही नहीं कितना अच्छा लगता है, जब गुजरे साल के अन्दर गाँव में ब्याह कर आयी बहू को हाथ में नारियल देकर उनकी आवभगत की जाती है, हर पैदा हुए शिशुओं के लिए कपडे सिले जाते हैं और उनको भेंट किये जाते हैं, युवकों और विद्यार्थियों को उनकी वर्ष के दौरान हुई विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाता है. समारोह का समापन प्रीतिभोज के साथ होता है. गौरतलब है कि इस समारोह में जाति-धर्म, ऊँच-नीच का कोई भेद नहीं होता.

एक आदर्श ग्राम की स्थापना की है इन्होने जिसे हम सिर्फ कल्पना मान सकते हैं. एक सपना अभी भी पल रहा है उनके दिल में. इस ग्राम को वे चावल का सिर्फ एक दाना मानते हैं और इनकी ख्वाहिश है कि पूरा देश इस चावल की पतीली बन जाए.

भ्रष्टाचार के ज़हर भरे माहौल में इस जैसे नायक को हमेशा नकार दिया जाता है. लेकिन जो शख्स ७३ साल की उम्र तक नहीं सुधरा वो अब क्या सुधरेगा. जो भ्रष्टाचारी थे उन्होंने उसे कारावास में भेज दिया, लेकिन ये कहाँ सुधरने वाले. जिसके गाँव में फलों से लदे वृक्ष पर कोई पत्थर नहीं मारता और ऐसे पेड़ों की सुरक्षा के लिए कोई पहरेदार नहीं होता, वो चुप कहाँ बैठने वाला.
 
इस शख्स का नाम है किसन बाबूराव हजारे, सारी दुनिया के लिए अन्ना हज़ारे जो भष्टाचार के खिलाफ युद्द की घोषणाकर 5 अप्रैल से दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ रहें हैं। India Against Corruption सहित बहुत से संगठन इस लडाई में अन्ना हज़ारे का साथ देने हो खड़े हैं। अन्ना हज़ारे की मांग है कि ईमानदार प्रधानमंत्री देश के सम्मानित नागरिकों द्वारा बनाये गये “लोकपाल बिल” को कानून बनाने की दिशा में कार्यवाही करें। यह बिल सीबीआई और सीवीसी जैसी संस्थाऑं को पीएमओ के नियंत्रण से निकालकर, भ्रष्टाचार को सर्वोच्च तल पर नेस्तानाबूत करने की बात करता है।

अन्ना ने देशवासियों से 5 अप्रैल को व्रत रखकर, भष्टाचार के खिलाफ इस युद्ध में प्रतीकात्मक सहयोग देने का आवाहन किया है। जो लोग दिल्ली में हैं वह जंतर मंतर पर जाकर इस लडाई में अपने शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं। “सम्वेदना के स्वर” लिये सलिल वर्मा वहाँ मौज़ूद रहेंगें, व्रत तो होगा ही हमारा। और आप ?

 

भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होने और अन्ना हज़ारे के इस अनशन में आप अपना नैतिक सहयोग दर्ज करने के लिये इस नम्बर (02261550789) पर मिस काल कर सकते है।

Friday, April 1, 2011

इस सप्ताह आपका राशिफल

मेष राशि:
गोचर के अनुसार, लग्न में बुध होने के कारण, आपके लिए ऊनी कवितायें लिखने का समय आ गया है। जो कवितायें ना लिखते हों, वो इस माह से प्रारम्भ कर सकते हैं। तापमान के बढ़ने के साथ साथ आपकी कविताओं की लोकप्रियता भी बढ़ेगी, किन्तु सर्दियां शुरू होते ही सावधान हो जाएँ. इस मौसम में हो सकता है कि आलोचक आपकी कविता की ऊन उतार लें.

राशि स्वामी मंगल व्यय भाव में होने के कारण ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है, इसके लिये आप ब्लॉग जगत पर नज़र रखें और जिन विषयों पर बहुत सारी टिप्पणियाँ आ रही हों, उन विषयों पर आप भी लिखना शुरू कर दें। इस भेडचाल में मेष राशि के लोगों को अदभुत सफलता मिलाने की संभावनाएं हैं।

वृष राशि:
जिनका जन्म इस राशि में हुआ है, उनके लिए कष्टकारक दशा चल रही है. उन्हें कोल्हू के बैल की तरह मेहनत करनी पड़ेगी. दिन भर में कम से कम १०८ पोस्टों को पढ़ें और कम से कम १०८ टिप्पणियाँ डालें, तब जाकर कहीं अपनी पोस्ट के लिए १८ टिप्पणियों का जुगाड़ कर पाएंगे. अल्पकालिक कष्ट तो आपके लिए बना ही रहेगा. नए ब्लोगर बहुत सोच विचार कर इस माह में ब्लॉग लेखन आरम्भ करें. आपके लिए सलाह यही है कि आँखों पर पट्टी बांधकर सिर्फ सफलता का स्मरण कर अपनी काम में लगे रहें. नए ब्लोगर्स को सफलता अवश्य मिलेगी और जिनकी टिप्पणियाँ कम हो गयीं हों, उन्हें गुप्त धन के रूप में ढेरों टिप्पणियाँ प्राप्त होने का योग है.

मिथुन राशि:
इस राशि के पंडित व विद्वान् जातकों के लिए यह अत्यंत सुनहरा अवसर है. उनका भविष्य अत्यंत उज्जवल है. वे जिन विषयों पर अभी भी लिख रहे हैं, उसे बिलकुल थामे रहें और उसपर अधिक ध्यान केन्द्रित करें. आपका लेखन उत्तरोत्तर प्रगति करेगा और टिप्पणियों की संख्या मंम अनपेक्षित बढ़ोत्तरी होगी. कृपया अपनी पोस्ट लगाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखें वो संध्यावेला में लगाईं जाएँ ताकि पढ़ने वाले को उचित समय और वातावरण मिले.

इस राशि के जातक के लिए मौसम का कोई असर पोस्ट की लोकप्रियता पर नहीं दिखेगा. ध्यान सिर्फ इस बात का रखना है कि अपने विषय से भटकाव न होने पाए.

कर्क राशि:
इस राशि के समूह के लिए वर्षफल सुखदायक नहीं है. यहाँ प्रतियोगिता के साथ कष्ट भी बहुत है. सामान विषयों पर लेखन के कारण इनका एक समूह बन जाता है. और इस राशि के ब्लोगर्स हमेशा समूह बनाकर रहना पसंद करते हैं. किन्तु यह मेल ऊपर से दिखाई देता है. जब एक ब्लोगर की टिप्पणियाँ बढ़ती हैं तो दूसरा सामान राशि का ब्लोगर उसपर बेनामी टिप्पणियों की बौछार कार उसको नीचे खींचने में लग जाता है.

हिम्मत न हारें, क्योंकि यह क्रम चलते ही रहने वाला है. दो चार बेनामी ब्लोगर्स को काम पर रख लें जो आपकी और से दिन भर बेनामी टिप्पणियाँ आपके विरोधियों पर करते रहेंगे.

सिंह राशि:

आपके विरुद्ध आलोचना करने वाले की टिप्पणियों से आपको कोई घबराहट नहीं होगी. आप प्रति टिप्पणियों में उनका विरोध करते रहें. कई और ब्लोगर्स को साथ में लेकर चलें और उनको फोन/मेल द्वारा सूचित कर विरोधी का परास्त करने का आमंत्रण दें। मोडरेशन भूल कर भी न लगाएं. आलोचना की टिप्पणियाँ प्रकाशित होने दें और फिर आलोचक की धुलाई करें।

अगर कोई आलोचना न करे तो अपने ही किसी मित्र को कहकर उससे असहमति क़ी टिप्पणी डलवायें. फिर विरोध करें. इससे आपकी शक्ति क़ी चर्चा होगी, और भविष्य में कोई विरोध के स्वर उठाने का साहस नहीं कर पायेगा. इससे आपको नए पाठक भी मिलेंगे और पुराने भी प्रशंसा करते नज़र आयेंगे.

कन्या राशि:
राशी के चौथे और दसवें भाव में राहू और केतू होने के कारण आपकी हालात धोबी के श्वान सरीखी रहेगी, न घर के न घाट के। शनि की साढेसाती से मनमस्तिष्क स्वम को जकडन में पायेंगे और अगली पोस्ट के लिये विषय चुनने में बहुत कठिनाई आयेंगी।

आपके लिये सरल उपाय है कि किसी महिला ब्लोगर पर बेनामी टिप्पणी कर आलोचना करें इसके बाद उस ब्लोग पर नज़र रखें, शीघ्र ही आप वहा मत विभाजन हुआ पायेंगे। अपनी बात फिर अपने ब्लोग पर पोस्ट लगा कर आगे बढायें इससे न सिर्फ आपकी प्रसिद्धि होगी बल्कि फालोअर्स की संख्या में भी आशातीत वृद्धि होगी।

तुला राशि :
आप पर शनि की साढेसाती अभी अभी ही शुरु हुयी है, शनि आपकी राशी के लिये योगकारक है और जो भी आप लिखेंगे वो हिट जायेगा। आप यदि अखबार की खबर या भौतिकी शास्त्र की किताब के पन्ने भी छाप देंगे तो लोग वाह वाह करेंगे।

शनि की असीम कृपा है आप पर, हसन अली की तरह मस्त रहें आपका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता।

वृश्चिक राशि:
आपका सन्देह करने वाला मन ही आपका सबसे बड़ा दुश्मन है। आप क्यों नहीं मान लेते की आप सबसे बड़े ब्लोगर हैं और रहेंगे। आप बार क्यों यह आजमाते हैं कि आपकी सत्ता को कोई चुनोती दे रहा है। लोगों से मिलते मिलाते रहें, फोन खटखटाते रहें सल्तनत बनी रहेगी। दशम भाव में शनि आपको लोकप्रिय बनाये रखेगा, हाँ टिप्पणीयों की संख्या कृष्ण पक्ष में कुछ कम हो सकती है परंतु शुक्ल पक्ष में सब समान्य हो जायेगा। सम्वेदना के स्वर नामक ब्लोग का नियमित पाठ करें लाभ होगा।

धनु राशि:
इस राशि में राहू महाराज विराजमान हैं, बहुत सारे उल्टे सीधे विषयों पर लिखने का मन करेगा, परंतु आप खतरों से न घबरायें हर नयी चुनौती नये अवसर देने वाली साबित होगी। आप अपनी टिप्पणी रुपी प्रत्यंचा पर कुछ श्लोक हमेशा रखे और अवसर मिलते ही निशाने पर दाग दें। इस माह आप पर किसी ब्लोग गिरोह द्वारा आक्रमण होने की प्रबल सम्भावना है। “स” अक्षर से शुरु होने वाले ग्यारह ब्लोग्स की प्रतिदिन ग्यारह बार परिक्रमा करें लाभ होगा।

मकर राशि:
इस राशि के समूह के लिए वर्षफल सुखदायक नहीं है. यहाँ प्रतियोगिता के साथ कष्ट भी बहुत है. सामान विषयों पर लेखन के कारण इनका एक समूह बन जाता है. और इस राशि के ब्लोगर्स हमेशा समूह बनाकर रहन पसंद करते हैं. किन्तु यह मेल ऊपर से दिखाई देता है. जब एक ब्लोगर की टिप्पणियाँ बढ़ती हैं तो दूसरा सामान राशि का ब्लोगर उसपर बेनामी टिप्पणियों की बौछार कार उसको नीचे खींचने में लग जाता है.

हिम्मत न हारें, क्योंकि यह क्रम चलते ही रहने वाला है. दो चार बेनामी ब्लोगर्स को काम पर रख लें जो आपकी और से दिन भर बेनामी टिप्पणियाँ आपके विरोधियों पर करते रहेंगे. क्योंकि आम तौर पर बेनामियों की छिपी पहचान के बावजूद भी उनका वजूद आपको पता चल ही जाता है. इस प्रकार दुष्प्रचार होते हुए भी आपको प्रचार का लाभ मिलता रहेगा.

कुम्भ राशि:
कुम्भ राशि में आज शुक्र और चन्द्र का सुन्दर सयोंग बन रहा है, यह समय है भोग विलास के विषयों को अपनी लेखनी से जाग्रत करने का। बादल, तितली और बारिश पर लिखी कवितायें कम से कम पचास टिप्प्णीयां पूर्णमासी तक अवश्य प्राप्त करेंगी।

लग्न से अष्ठम स्थान पर वक्री शनि होने के कारण कोई मनचली टिप्पणी विवाद की स्थिति पैदा कर सकती है। उपाय के तौर पर किसी ब्लोगर गिरोह के तुरंत सदस्य बनें और उन्हे प्रशंसात्मक टिप्पणीयों का दान दें, राहत मिलेगी।

मीन राशि:
मीन राशि में इस समय, इस राशी के स्वामी बृहस्पति, सूर्य और मंगल के साथ विराजमान हैं, फिर मीन राशि पर शनि की सप्तम दृष्टि भी है, इस कारण गुरु ब्लोगर्स के साथ पंगा लेने का स्वर्णिम अवसर है। इस समय लिये गये पंगे आपके लिये प्रसिद्धि के नये द्वार खोलेंगे।

किसी सिहं राशि वाले की तारीफ में एक पोस्ट लिखें और उसे अपने आफिस के नेट कनेक्शन से, उस दिशा मे मुहं करके पोस्ट करें, जिस दिशा में कलेंडर लगा हो। ध्यान से उस कलेंडर को देखे की आज क्या तारीख है। यदि फर्स्ट अप्रैल लिखा नज़र आये तो ठहाका लगायें और इससे भी अच्छी पोस्ट लिखकर मुस्कुराहटें बाटें, लाभ होग :)

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