सम्वेदना के स्वर

यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,

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सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....

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Wednesday, March 30, 2011

इस मौसम की बदसूरती के खिलाफ – (मोहाली से सीधा प्रसारण)

मोहाली में पँजाब क्रिकेट एसोसिएशन के स्टेडियम से कुछ दूरी पर घर है, पंजाबी कवि अमरजीत कौंके का। उनकी एक कविता “इस मौसम की बदसूरती के खिलाफ” न जाने क्यों अनायास ही स्मरण में आ गयी, सोचा पोस्ट के माध्यम से आज क्यों न इसी का सीधा प्रसारण कर दिया जाये !

इस मौसम की
बदसूरती के खिलाफ
मैं इतना करुंगा -

मैं उखाड़ कर फेंक दूंगा
गमलों में उगे तुम्हारे कैक्टस
और बोऊंगा इस मिट्टी में

गुलाब के बीज



तुम देखोगे
कि इस मिट्टी में
जहाँ उगे थे तुम्हारे
कटींले कैक्टस
वहीं खिलेंगे – सुर्ख गुलाब

जो महका देंगे
समूचा वातावरण

मै इतना करुंगा
कि मै घर में पालूंगा
एक बुलबुल
जिसके गीत टकराएंगे
इन काली खबरों से
और यकीन है मुझे
कि लौटेंगे विजयी हो कर

इस मौसम की
बदसूरती के खिलाफ

मैं अपने बच्चों के
होठों पर बांसुरी
और हाथों पर पुस्तकें रखूंगा

मैं इतना करूंगा !
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