राधाकृष्णन एक शिक्षक थे, फिर वो राष्ट्रपति हो गये, तो सारे हिदुस्तान में शिक्षकों ने समारोह मनाना शुरु कर दिया “शिक्षक दिवस”.भूल से मैं भी दिल्ली में था और मुझे भी कुछ शिक्षकों ने बुला लिया. मै उनके बीच गया और मैने उनसे कहा कि मै हैरान हूं, एक शिक्षक राजनीतिज्ञ हो जाये तो इसमें “ शिक्षक दिवस” मनाने की कौन सी बात है? इसमे शिक्षक का कौन सा सम्मान है? यह शिक्षक का अपमान है कि एक शिक्षक ने शिक्षक होने में आनन्द नही समझा और राजनीतिज्ञ होने की तरफ गया.जिस दिन कोई राष्ट्रपति शिक्षक हो जाये किसी स्कूल मे आकर, और कहे कि मुझे राष्ट्रपति नहीं होना, मै शिक्षक होना चाहता हूं! उस दिन “शिक्षक दिवस” मनाना. अभी “शिक्षक दिवस” मनाने की जरुरत नहीं है...
स्कूल का शिक्षक कहे कि हमें राष्ट्रपति होना है? मिनिस्टर होना है? तो इसमे शिक्षक का कौन सा सम्मान है ? यह तो राष्ट्रपति का सम्मान है! ..
(ओशो की पुस्तक “नये समाज की खोज” के “विश्व शांति के तीन उपाय” प्रवचन से उद्धृत)
सम्वेदना के स्वर
यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,
जिसमें भाव रस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-र-त बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....
जिसमें भाव रस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-र-त बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....
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Monday, September 5, 2011
शिक्षक-दिवस - रीपोस्ट
Sunday, September 5, 2010
“शिक्षक-दिवस” - शिक्षक का सम्मान या अपमान?
राधाकृष्णन एक शिक्षक थे, फिर वो राष्ट्रपति हो गये, तो सारे हिदुस्तान में शिक्षकों ने समारोह मनाना शुरु कर दिया “शिक्षक दिवस”.भूल से मैं भी दिल्ली में था और मुझे भी कुछ शिक्षकों ने बुला लिया. मै उनके बीच गया और मैने उनसे कहा कि मै हैरान हूं, एक शिक्षक राजनीतिज्ञ हो जाये तो इसमें “ शिक्षक दिवस” मनाने की कौन सी बात है? इसमे शिक्षक का कौन सा सम्मान है? यह शिक्षक का अपमान है कि एक शिक्षक ने शिक्षक होने में आनन्द नही समझा और राजनीतिज्ञ होने की तरफ गया.जिस दिन कोई राष्ट्रपति शिक्षक हो जाये किसी स्कूल मे आकर, और कहे कि मुझे राष्ट्रपति नहीं होना, मै शिक्षक होना चाहता हूं! उस दिन “शिक्षक दिवस” मनाना. अभी “शिक्षक दिवस” मनाने की जरुरत नहीं है...
स्कूल का शिक्षक कहे कि हमें राष्ट्रपति होना है? मिनिस्टर होना है? तो इसमे शिक्षक का कौन सा सम्मान है ? यह तो राष्ट्रपति का सम्मान है! ..
(ओशो की पुस्तक “नये समाज की खोज” के “विश्व शांति के तीन उपाय” प्रवचन से उद्धृत)
एक बात और... देश में अब तक कई शिक्षक राष्ट्रपति हो चुके हैं.उसके बावजूद साक्षरता की दर का सच इस रिपोर्ट में हैः
दिल्ली 25 अगस्त 2010 (वार्ता के सौजन्य से)साक्षरता दर के मामले में पड़ोसी देश श्रीलंका भारत से आगे है।मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी पुरनदेश्वरी ने आज लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि 2000 से 2007 के बीच 15 साल से अधिक के उम्र के लोगों में भारत में साक्षरता दर 66 प्रतिशत थी जबकि श्रीलंका में यह 91 प्रतिशत थी।उन्होंने बताया कि 1991की जनगणना के समय अखिल भारतीय स्तर पर साक्षरता 52.21 प्रतिशत थी जो 2001 में बढ़कर 64.84 हो गयी। इस प्रकार दस वर्षों में साक्षरता दर में 12.63 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
और जो इन सरकारी आँकड़ों में साक्षर हैं उनके हाल तो सबको पता है, नाम लिख लेना, नरेगा के रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर लेना, इतना काफी है सरकारी आँकड़ों के बाज़ीगरों के लिये.
सकल घरेलू उत्पाद (जिसको लेकर खूब हल्ला मचा रहता है बड़े बड़े ज्ञानी लोगों में) उसका 2% से भी कम शिक्षा और स्वास्थ दोनों को मिलाकर खर्च किया जाता है.
(यह जानकारी स्वयम् योजना आयोग के सदस्य लोकसभा चैनल पर कुछ दिन पहले दे रहे थे).
नेशनल ज्यौग्राफ़िक की इस तस्वीर को ग़ौर से देखिए... यह हमारी शिक्षा का भविष्य है, हमारा आने वाला कल!!
“शिक्षक दिवस” की बधाइयाँ!!
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