“बुद्धू बक्से का बुद्ध – लोक सभा चैनल”… अपनी इस पुरानी पोस्ट में हमने स्वामी अग्निवेश के कार्यक्रम, “विचार मंथन” को सर्वोच्च स्थान पर रखा था. कारण सिर्फ इतना कि यह बेह्तरीन कार्यक्रम, भारत और इंडिया के विभाजन को, न मालूम कितने दृष्टिकोणों से उभार कर दिखाता है. इसी कार्यक्रम के एक एपीसोड में उन्होंने “मैला उठाने वालों” को लोकसभा चैनल के स्टूडियो में बुलाया था. इस कार्यक्रम में बिना किसी लाग-लपेट और चीख-चिल्लाहट के, आधुनिक समाज में इस तरह के काम और काम करने वालों की समस्यायों को ही नहीं बताया गया, अपितु मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण की पूरी व्यवस्था को कुछ इस तरह उभार कर सामने लाया गया कि हमें ख़ुद पर शर्म आने लगी! यह आत्मग्लानि सालने लगी कि अप्रत्यक्ष रूप से हम भी इस षड़यंत्र में शामिल हैं, जिसमें देश का एक पूरा समाज जानवरों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर है. आखिर यह देश सबका है फिर इतनी असमानतायें क्यों ?
ख़ैर! इस कार्यक्रम का अन्त होने तक स्वामी अग्निवेश भी इतने द्रवित हो गये कि सजल नेत्रों से भावपूर्ण होकर, उन्होनें मंच पर उन सभी बुजुर्ग महिलाओं को बुलाया तथा माँ कह्कर सबके चरण स्पर्श किये और प्रतिज्ञा ली इस प्रथा के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखने की. उन्होंने स्वीकारा कि इस दिन से पहले अपनी माता के अतिरिक्त उन्होंने किसी स्त्री के चरण स्पर्श नहीं किए.
जब इंडिया के तुर्रम खाँ न्यूज़ चैनल; क़िकेट और बॉलीवुड की रंगीनियों की किस्सागोई कर रहे थे या किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विपक्ष में माहौल बनाने या बिगाड़ने की जुगत लगा रहे थे, तब स्वामी अग्निवेश लोकसभा चैनल पर अपने इस “विचारमंथन” कार्यक्रम में भारत के वास्तविक और ज़मीनी मुद्दों को चुन चुन कर सामने ला रहे थे, जैसे समाज मे फैलती शराबखोरी, ग्राम स्वराज –डिबरे बाज़ार, आदिवासियों की स्थिति, उपभोक्तावाद के दुष्परिणाम, खाप पंचायतों का सच, जेनेटिक फूड, कृषि क्षेत्र की समस्यायें आदि.
पिछले कुछ समय से अचानक यह कार्यक्रम बन्द हो गया. हमें एक अजीब सी परेशानी हो चली. लोकसभा चैनल के हम जैसे प्रेमियों को, इस कार्यक्रम की कमी बेहद खल रही है. रविवार की सुबह 9 बजे से 10 बजे का समय बहुत कचोटता है, इन दिनों!
अगर कार्यक्रम नहीं दिखाया जा रहा तो सवाल ये उठता है कि स्वामी अग्निवेश हैं कहाँ आजकल?
खबरों पर नज़र रखने वालों को पता होगा कि स्वामी अग्निवेश को भारत सरकार ने माओवादियों से वार्ता के लिये, अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है. पिछले दिनों स्वामी अग्निवेश से सम्बन्धित सभी खबरें हम “प्रिंट-मीडिया” में ट्रैक करते रहे (क्या करें! “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया” में तो इस तरह की खबरों की कोई जगह ही नहीं होती). खबरें तो अनेक थीं पर कोई खबर स्वामी अग्निवेश के बाबत नहीं थी.
कल रविवार दोपहर 2 बजे अचानक ही न्यूज़ एक्स चैनल पर महिला पत्रकार सीमा चिश्ती द्वारा स्वामी अग्निवेश का एक साक्षात्कार देखा, तो बहुत सी बातें खुल कर सामने आईं. इस साक्षात्कार में स्वामी अग्निवेश ने बताया कि माओवादियों के प्रतिनिधि के तौर पर किसी आज़ाद नामक व्यक्ति से उनकी बातचीत चल रही थी. भारत सरकार की ओर से 72 घंटे के सीज़-फायर का प्रस्ताव भी था. लेकिन इस बीच स्वामी जी को खबर मिली कि आदिलाबाद के जंगलों में हुए एक एनकाउंटर में आज़ाद और उत्तराखण्ड के एक पत्रकार हिमांशु पांडे को माओवादी कहकर मुठभेड़ में मार दिया गया है.
इस सारे घटनाक्रम से स्वामी अग्निवेश बहुत विचलित हुए हैं. उन्होंने बताया कि वो देश के गृहमंत्री से भी मिले, इस एनकाउंटर की जांच की विनती लेकर. परंतु गृहमंत्री जी ने एक वकील की तरह दो टूक जबाब दे दिया कि जब माओवादियों के द्वारा मारे गये सैकड़ों लोगों की हत्या की जाँच नहीं हो रही है, तो इन दो माओवादियों कि क्यों ?
बहरहाल, इतने पर भी स्वामी अग्निवेश ने आशा नहीं छोड़ी है. वो शांति-वार्ता के प्रयासों में लगे हैं!
स्वामी अग्निवेश के प्रयास सफल हों! माओवादियों में सम्वेदनाएँ जगें और सरकार भी सम्वेदनशील हों, यही आशा की जा सकती है, अब.
टेलीविज़न के स्टूडियो से निकल कर, अपनी जान हथेली पर लेकर निकले इस शांति के मसीहे की सम्वेदनाओं में हमारे स्वर भी शामिल हैं. स्वामी अग्निवेश जैसे लोगों को हम सब की दुआएँ चाहियें...
लोकसभा चैनल पर “विचारमंथन” कार्यक्रम का इंतज़ार...अब हम क़यामत तक करने को तैयार हैं.
