चार महीने, इकतालीस फॉलोअर, पैंतालीस पोस्ट, 430 टिप्पणियाँ और इससे भी कहीं ज़्यादा लोगों से बने रिश्ते... ये आँकड़े नहीं हैं, यह एक टीस है, जो जितना चुभती है, उतना ही हमारी सम्वेदना के स्वर मुखर होते हैं. यह एक बड़ा ही नाज़ुक एहसास है, जब भी गुज़रता है हमारे दिल के आसमान से, सराबोर कर जाता है कविता, ग़ज़ल या नज़्म की बारिश में. कितनों को पढ़ा और उनके जज़्बात के हमसफर बने, कितनी टिप्पणियाँ लिखीं. लेकिन जो लिखा बेबाक, जैसा महसूस किया! कई बड़ों के आशीर्वाद लिए, छोटों को सलाहियत दी... गोया एक पूरा ख़ानदान गढ़ लिया हमने, ब्लोग की इस अनजान सी क़ायनात में....
आज की पोस्ट डेडिकेटेड है उस शख्स को जिसने चाँद को सिर्फ घटती बढती कलाओं में ही नहीं, बल्कि उससे भी आगे जाकर देखा है. जिसे चाँद कभी महबूबा की जगह रोटी नज़र आता है, कभी भिखारन के हाथ का कटोरा और कभी चमकीली अठन्नी… चाँद का शायद ही कोई ऐसा रूप होगा, जो इनसे छिपा हो. और इंतिहाँ ये कि इन्होंने एलानिया तौर पर कह दिया है कि "चाँद चुरा के लाया हूँ". लिहाज़ा किसी दूसरे के लिए कोई सूरत नज़र नहीं छोड़ी. साईंसदान चाँद पर ज़िंदगी तलाश करने में मसरूफ़ हैं और आज हमने अपनी इन छोटी नज़्मों के मार्फत ये एलान कर दिया है कि चाँद हुआ गुलज़ार.
RUMOUR
कब सोचा था दादी नानी के सारे अफसाने बिल्कुल झूटे होंगे,
चाँद पे कोई बुढिया रहती है, ये सब बस कोरी गप्प थी.
आज ही मैं ने जाना है ये
चाँद पे रहता है एक शख्स सफेद पजामे कुर्ते
और तिल्लेवाली एक जूती पहने
बुढिया की अफवाह उसी ने फैलाई थी सदियों पहले.
आज ही मैंने जाना है
इक नाम भला सा है उसका
और भरी हुई है सिर से लेकर पाँव तलक
भरपूर मोहब्बत, गहरा प्यार
ज़ुबाँ पे क्यों आता ही नहीं... सम्पूरन सिंह गुलज़ार.
WATER LOGGING
कल की रात हुई थी बारिश
आसमान में चारों ओर थी वाटर लॉगिंग
एक तारे ने दूसरे तारे की उँगली को थाम रखा था
दूसरे तारे ने धीरे से पैर जमाकर चाँद के ऊपर
पानी का गड्ढा हौले से फाँद लिया था.
CRIME RATE
सचमुच क्राईम रेट आज आकाश की हद तक पहुँच गया है
कुछ दिन पहले तक तो पूरा चाँद
टँगा था आसमान में.
आज की रात जो देखा मैंने
कोई आधा काट के अपने साथ ले गया.

