सम्वेदना के स्वर

यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,

जिसमें भाव रस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-- बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....

Friday, February 12, 2010

समर्पण

जडें, ज़मीन और मिट्टी...
ज़रूरतें, उम्मीदें और सपनें...
नारे, वादे और नेता...
संसद, संविधान और राष्ट्र...
न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और मीडिया ...
इतने भारी -भरकम शब्दों के बीच दबा है बेचारा आम आदमी...
हमारे ब्लॉग का हीरो!!
आपको शायद कहीं आपका कोई पडोसी नज़र आ जाये,खुद आपकी आपसे मुलाक़ात हो जाये या फिर हो सकता है आपके मन मस्तिष्क में छिपे किसी सवाल का जवाब मिल जाए। ऐसा भी हो सकता है कि कोई सवाल ही खड़ा हो जाए आपके सामने। सवाल खड़ा हो तो और भी अच्छा है, क्योंकि हमारी कोशिश यही है कि आप सवाल करें।
समर्पण
आम आदमी!
अपनी समस्याओं की वासुकी की रज्जु लिए
अपनी आवश्यकताओं के मंदराचल से
नित्य सागर मंथन में है रत - आम आदमी!
देवों की तरह जुता है एक ओर
दूसरी ओर है दानवों का दल
हो रहा है सागर मंथन में प्राप्त
सभी द्रव्यों का अनोखा विभाजन
अमृत तो मिल गया दानवों को
और दरिद्रनारायण बने देव सदृश आम आदमी को मिला
सदा से मिलने वाला गरल हलाहल।
आम आदमी
अपने कंठ में धारण किये उस विष को
विवश है निरीह जीवन जीने को
आज के युग का नीलकंठ है वो
क्योंकि भोगता है वही घिनौना सत्य !
नीलकंठ सा वही तो है शिव !!
जीवन की कुरूपता को माने बैठा है सुन्दर !!!
ये आम आदमी...

3 comments:

naveen said...

10% GDP Growth ke pagalpan me, our Government and intelligensia has forgotten the "AAM AADMI" and his real problems. "Aam Aadmi" kisi Ad campaign ke tarah use ho raha hai....
I am not able to understand this 10% GDP growth ki Philosophy? are you?.....now government's own statistics says that since during past 6-8 years the number of poor people have increased from 27% to 37% (suresh tendulkar committee's report). Kabhi Kabhi to lagta hai ki western countries ko recession se ubaarne ke liye hai ye sab 10% GDP growth ka pakhand. The principle to eradicate poverty is "Trickle Down Effect" means when a rich person will get say Rs 1,00,000 per month his servant will get Rs 5,000 per month. Economic exploitation is the bottomline of this consumerist economic policy of present day system......it is hight time the world Socialism should be expunged from the preamble of our constitution.

naveen rawat

SAMVEDANA KE SWAR said...

naveen ji,
is barood ko bachakar rakhiye.. bahut kaam aayega, is blog ke liye..
jude rahiy aur isi tarah margdarshan karte rahiye..

Apanatva said...

:)

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