सम्वेदना के स्वर

यह ब्लॉग उस सनातन उत्सवधर्मिता को जीवित रखने का प्रयास है,

जिसमें भाव रस और ताल का प्रतीक आम आदमी का भा-- बसता है.
सम्वेदनाएँ...जो कला, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, राजनीति आदि के माध्यम से अभिव्यक्त होती हैं, आम आदमी के मन, जीवन और सरोकार से होकर गुज़रती हैं तथा तलाशती हैं उस भारत को, जो निरंतर लड़ रहा है अपने अस्तित्व की लड़ाई.....

Thursday, April 7, 2011

एक दो तीन चार, अन्ना तेरे हम हैं साथ


एक
व्यवस्था का भ्रष्टाचार जिसे सहन नहीं था
और फिर
भ्रष्टाचार के ही व्यवस्था बन जाने पर
वह, व्यवस्था को सहन नहीं था।

किसी फकीर का आशीर्वाद लेने
वो कल जंतर-मंतर गया था।

दो
पिछली चुनाव रैली में
जिस 13 साल के लड़के ने
भीड़ चीर कर तुमसे हाथ मिलाया था

जंतर मंतर पर खड़ा वो
आज तुम पर उंगली उठा रहा है

वो अब 18 का हो गया है।

तीन
आज दफ्तर के कोने में पड़ी
बापू की तस्वीर उसने ढूंढ निकाली

और अन्ना अन्ना बुदबुदाते हुये
अपने सीने से लगा ली।

चार
भेड़िय़ॉं के झुंड़ में
दो दिनों से
बहुत खलबली है।

एक गाय ने अपने सींग में
श्मशान की राख मली है।


23 comments:

सुशील बाकलीवाल said...

अन्ना का ये आंदोलन हमारे लिये.

हम सब इसमें साथ हैं ।

Apanatva said...

hum sab sath hai .

ati jab ho jae
jarooree ho jata hai
karana iseka ant .

desh ko sahee
disha dikhane wale
Anna aap hai ek sant.

अरुण चन्द्र रॉय said...

अन्ना नए गाँधी हैं.

nilesh mathur said...

वाह! क्या बात है, अन्ना जिंदाबाद!

राजेश उत्‍साही said...

हमको शोभा के जेवर नहीं

तीखे ऐसे ही तेवर चाहिए।

*

अन्‍ना हजारे,हजारों हैं साथ तुम्‍हारे।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

18 saal ke bacce ka dar to inke andar aa hi jana chahiye...bachpan men padhaya jata hai..chacha nehru...chacha nehru..baal diwas manaya jata hai...18 saal ka hote hee bacche ko hakeekat samjh aa jatee hai...

सुज्ञ said...

भ्रष्टाचार के खिलाफ़ उठने वाली हर आवाज, हर हाथ को हमारा साथ।

दिगम्बर नासवा said...

ये शमशान की रालख सभी को मलनि होगी .... कहीं देर न हो जाए ... आना का साथ देना चाहिए सभी को ... इस हवन में सामिग्रि सब को डालनी चाहिए ...

प्रवीण पाण्डेय said...

हलचल स्वाभाविक है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यही तेवर होने चाहिए ..

ZEAL said...

अन्ना अन्ना , बुदबुदाते हुए , गाँधी की तस्वीर सीने से लगा ली ....सटीक अभिव्यक्ति !

प्रिया said...

Bilkul Ham bhi hai saath mein....In bhrastachiyon jab tak saja nahi milegi...ye kaanoon ke loop holes ka fayda uthate rahenge ....Anna wala Janlokpaal vedheyak paas hona hi chahiye ....Vrana kranti ka bigul to baj chuka hai

नीरज गोस्वामी said...

अगर हम अन्ना हजारे बन नहीं सकते तो कम से कम उसका साथ तो दे ही सकते हैं...

नीरज

दीपक बाबा said...

अब ये काफिला नहीं रुकेगा....

Deepak Saini said...

हम सब अन्ना के साथ हैं ।

kase kahun?by kavita. said...

ye har bhartiya ke dil ki awaz hai.. anna ham tumhare sath hai...

मनोज कुमार said...

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में हर कोई एकजुट है।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

वन्दना के इन सुरों में एक सुर मेरा मिलालो---
अन्याय के विरोध में उठने वाली हर आवाज को नमन चाहे वह इरोम हो या हजारे । हम कुछ नही भी कर पाएं पर सच्चाई का समर्थन तो कर ही सकते हैं ।

सुलभ said...

हम हैं साथ साथ

Rahul Singh said...

स्‍वागतेय वैचारिक बयार. (भाइयों को ऐतराज न हो कि आंधी, तूफान, सुनामी क्‍यों नहीं कहा जा रहा है)

संजय @ मो सम कौन ? said...

एक, दो, तीन, चार
चारों क्षणिकाएं शानदार॥

रचना said...


खुद ईमानदार होते हुए भी जब इंसान गरीब होता हैं और बेईमान को अमीर देखता हैं तो शायद रास्ता दिखना बंद हो जाता हैं

Udan Tashtari said...

जबरदस्त!

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